झारखण्ड की सबसे खुबसूरत विधायक अम्बा प्रसाद की कहानी : Amba Prasad Biography in Hindi
झारखण्ड की सबसे खुबसूरत विधायक अम्बा प्रसाद की कहानी : Amba Prasad Biography in Hindi
Amba Prasad Biography : झारखंड में बड़कागांव से कांग्रेस विधायक अम्बा प्रसाद हमेशा सुर्खियो में रहती हैं। अम्बा प्रसाद झारखण्ड की सबसे खुबसूरत और अविवाहित विधायक रह चुके है | एक बार जब अम्बा प्रसाद विधायक थी तब वह सफ़ेद घोड़े पर सवार होकर विधानसभा पहुंची थीं। अम्बा प्रसाद ने कई नागपुरी गाना भी गाने के साथ साथ एक्टिंग भी की है |
इस लेख में हम जानेंगे की Amba Prasad Biography जन्म, शिक्षा, परिवार, सपने, उम्र, , राजनितिक करियर .
अम्बा प्रसाद की जन्म (Amba Prasad Biography)
बडकागांव से कांग्रेस विधायक अम्बा प्रसाद का जन्म सन 16 फरवरी 1989 को बडकागांव हजारीबाग झारखण्ड में हुवा है | अम्बा प्रसाद को वर्ष 2024 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा अम्बा प्रसाद झारखण्ड की सबसे खुबसूरत और अविवाहित पूर्व विधायक रह चुकी है
अम्बा प्रसाद की शिक्षा (Education)
अम्बा प्रसाद एक भारतीय राजनीतिज्ञ, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अपनी शिक्षा कार्मेल गर्ल्स स्कूल, हजारीबाग से मैट्रिक और डीएवी पब्लिक स्कूल, हजारीबाग से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। उन्होंने जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सर्विस से पीजीडीएम और विनोबा भावे यूनिवर्सिटी हजारीबाग से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की।
अम्बा प्रसाद की परिवार (Family)
उनके पिता योगेंद्र साओ झारखंड सरकार में मंत्री रह चुके हैं और उनकी मां निर्मला देवी पूर्व विधायक थीं। उन्होंने विनोबा भावे विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की और बाद में रांची उच्च न्यायालय में भूमि अधिकार और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर वकालत की।
अंबा के पिता जेल में, मां तड़ीपार
अंबा के पिता योगेंद्र प्रसाद साव वर्ष 2009 में बड़का गांव से विधायक का चुनाव जीते थे। 2013 में हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री बने थे। नक्सलियों से संबंध का खुलासा होने के बाद 2014 में इस्तीफा देना पड़ा। एनटीपीसी प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की वजह अब तक वो जेल में हैं। मां राज्य से बाहर हैं
अंबा प्रसाद के सपने (Dream)
अधूरा रहा IAS बनने का सपना
बड़कागांव विधानसभा सीट से 27 साल की अंबा प्रसाद ने चुनाव जीतकर 2019 में सबसे कम उम्र की विधायक बनने का इतिहास रचा था। आजसू पार्टी के प्रत्याशी रोशनलाल चौधरी को 30,140 वोटों से हराया था। अंबा के मुताबिक वो आईएएस बनना चाहती थीं, जिसके लिए वो दिल्ली में कोचिंग कर रही थीं। मगर पिता पर लगे गंभीर राजनीतिक आरोपों के कारण लौटना पड़ा, यहीं से उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हो गई।
अंबा प्रसाद कि उम्र (Age)
जन्म
16 फरवरी 1988 (उम्र 37)
बड़कागांव , झारखंड , भारत
राजनीतिक दल
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
अभिभावक
योगेन्द्र साव (पिता)
निर्मला देवी (माता)
निवास स्थान
पेहरा , हज़ारीबाग़ , झारखंड
अल्मा मेटर
विनोबा भावे विश्वविद्यालय (एलएलबी) जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सर्विस (पीजीडीएम)
पेशा
वकील
पेशा
राजनीतिज्ञ
राजनीति में कैसे आईं अंबा प्रसाद
अंबा प्रसाद को राजनीति विरासत में मिली है. बड़कागांव विधानसभा सीट से अंबा प्रसाद से पहले उनके पिता योगेंद्र साव 2009 में और मां निर्मला देवी ने 2014 में चुनाव जीतकर विधायक बने थे. उनके पिता मंत्री भी रहे . अंबा प्रसाद के मुताबिक, जब मेरे पिता राजनीति में थे तब मैं पढ़ाई कर रही थी. मुझे राजनीति से कोई मतलब नहीं था. 2013, 2014 के आसपास मेरे पिता को चुनाव से दूर करने की साजिश रची जा रही थी. उस दौरान मैं दिल्ली में UPSC की तैयारी कर रही थी. मैं ब्रेक लेकर झारखंड आई.
अंबा प्रसाद ने कहा कि इसके बाद मैंने अपने माता-पिता की मदद की. मेरे पिता अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं. पूरे झारखंड में वह लड़ाकू विमान की तरह जाने जाते हैं. लोग उनको बहुत मानते हैं. 2014 में मेरे पिता जब जेल गए तो मां को टिकट मिला. चुनाव में उनके लिए प्रचार करने के लिए मैं पढ़ाई से ब्रेक लेकर आई. उस चुनाव में मां की जीत हुई थी.
अंबा ने कहा कि मां के साथ कुछ दिन रहने के बाद UPSC की तैयारी करने के लिए मैं दिल्ली वापस आ गई. मैंने प्रीलिम्स निकाला. लेकिन उसके बाद मैं अपनी पढ़ाई आगे नहीं जारी रख सकी. 2016 में मेरा पूरा परिवार जेल चला गया. मैंने सब कुछ छोड़ दिया और झारखंड वापस आ गई. कांग्रेस की इस युवा नेता ने कहा कि क्षेत्र में विधायक की कमी न महसूस हो, इसके लिए मैं काम करना शुरू की. मैं समाज के लिए काम करना चाहती थी. IAS बनकर मैं ऐसा करना चाहती थी. लेकिन मेरे पिता ने कहा कि तुम्हें राजनीति में आना होगा. राजनीति में आने से पहले मैंने काफी विचार किया.
घोड़े पर सवार होकर पहुंची थीं विधानसभा
अंबा प्रसाद 2021 में चर्चा में आई थीं. वह 2021 में महिला दिवस पर घोड़े पर सवार होकर विधानसभा पहुंची थीं. हालांकि घोड़े को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई, लेकिन अंबा के इस अंदाज ने सबका दिल जीत लिया था. अंबा को ये घोड़ा रिटायर्ड कर्नल रवि राठौड़ ने गिफ्त दिया था.




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