Dugda Phadi Mandir
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चंद्रापुरा प्रखंड के अंतरगत जो पहाड़ी मंदिर है। माता की
नवरात्र मे विषेस पूजा - अर्चना होती है।शारदीय व वसंतीय
नवरात्र मे पहाड़ी मंदिर मे भिड़ देखने के लायक होता है ।
दुगदा पहाड़ी मंदिर मे मा दुर्गा की अस्टादस्भुजि
संगमरमर की प्रतिमा है और वहा पर अलग अलग देवी
देवताओ की प्रतिमा भी है । जैसे मा लक्ष्मी की संगमरमर
की प्रतिमा है जो हर मनुष्य को अपने तरफ आकर्षित
करती है । जगह जगह से लोग पूजा करने आते है ।
जैसे बाघमारा, बेरमो , तेलो आदि इलाकों से लोग पूजा
करने आते है जिसके कारण अह जगह काफी प्रचलित
है और इसको सुन्दर दिखने का कारण यह भी है क्युकी।
यह पहाड़ के ऊपर बसा हुवा जिसके कारण देखने मे
काफी मनमोहक लगता है । जिसके कारण अधिक लोग
देखने के लिए ललाइत होते है। पहाड़ी मे दो मंदिर एक
माता आस्टाभुजी की प्रतिमा है और दूसरी माता अष्टादसभुजी
की प्रतिमा हैं । यहा पर दोनो नवरात्र मे कलस स्थापना
व मा का पाठ किया जाता है । इस मंदिर मे ओर भी अलग
अलग प्रतिमाए है । जैसे संतोषी माता, शिवशंकर, संकटमोचन
हनुमान की ,रामदरबार, ओर् राधाकृष्ण की अलग मंदिर है
अहा रामनवमी मे के दी विषेस पूजा अर्चना होती है दुगदा
पहाड़ी मंदिर बहुत सारे बंदर देखने को मिलते है । और
पहाड़ी मंदिर मे विवाह भी होती है ।
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| One india |
दुगदा मे जो पहाडी मंदिर है वहा कितने वर्षो से पूजा
से पूजा होते आ रहा है ? हम उसके बारे मे जानेगें ।
चंद्रपुरा: प्रखंड के दुगदा कोयलांचल स्थित देवनग्री पहाड़ी
मंदिर मे अस्टभुजी एवं अस्टदश् भुजी मा देवी का दर्शन
करने को मिलता है यहां पिछले 48 वर्षो से दुर्गा पूजा
आयोजन होते आ रहा है । यहा खास बात यह है की विध्यांचल मे अस्थापित मूर्ति के आकृति का सरस्वती स्वरूप देवी
दुर्गा की अष्टभुजी एवं अस्टदश्भुजी लक्ष्मी स्वरूप देवी
दुर्गा की मूर्ति यहाँ अस्थापित है ऐसा झारखंड मे सिर्फ
दुगदा देवनगरी पहाडी मंदिर मे हि हैं । यहां आए भक्तो को
मनोकामना पुरा होने के साथ - साथ आलौकिक शांति कि
अनुभूति होती हैं । प्राकृतिक की गोद मे बसा हुवा दुगदा
पहाड़ी मंदिर को और मनमोहक ,मनोरम दृस्या बनता है ।
जिससे लोगो को अपनी तरफ आकर्षित करता है। बहुत
लोग दूर - दूर से आते है और दर्शन भी करते है ओर
घूमते भी है । बहुत सारे लोग ब्लॉग बनाते है ओर फोटो भी
खींचते है ।
दुगदा पहाडी मंदिर जाने का रास्ता
कैसे पहुचे मंदिर : धनबाद एवं बोकारो जिला मुख्यालय
से सडक मार्ग से लोहपिटृटी होते हुए करीब 35 किमी
कि दूरी तय कर दुगदा पहाडी पहुंच सकते है,
चंद्रापुरा रेलवे जंक्शन से दुगद पहाड़ी मंदिर की दूरी करीब
सात किमी है जहां से मंदिर जाने के लिए ऑटो उपलब्ध
रहता है । कई लोग अपने बाईक् से जाते है यहा अस्टादश्भुजी
भुजी मूर्ति अस्थापित होने के कारण लोग दूर-दूर से खींचे
चले आते है । यहां नवमी एवं दशमी मे भारी भिड़ उमड़ ती
है । यहा विजयादशमी को मेला लगता है । दुर्गा पूजा के अवसर मे अलग अलग प्रोग्राम का आयोजन भी होता है ।
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Nice sir
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteBahut khoob sir
ReplyDeleteAati uttam
ReplyDeleteMust sir
ReplyDeleteBahut acha
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