Jivan ka Anubhav
JEEVAN KA ANUBHAW
आप किसमे माहिर है ? इसको हम कहानी के
माध्यम से जानेंगे
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जिस चिज का अभ्यास करेंगे, आप उसी मे माहिर हो जाएंगे । इसकी एक कहानी भी है ।
एक आदमी था । वह तिर चलाने मे बड़ा माहिर था । वह जगह - जगह , गांव - गांव मे जाता था और प्रदर्शन करता था । वह ऐसा तिर चलाता था कि एकदम निर्धारीत निशाने पर जाकर लगता था । लोग ताली बजा ते थे और उसे बड़ा अच्छा लगता था , उसे मान - सम्मान मिलता था ।
एक दिन वह एक गांव मे गया हुवा था । उसके पीछे
लोग खड़े हुए थे । लोग उसके प्रदर्शन को देख रहे थे और
एक पिछे से आदमी आया , जो तेल बेचता ता था । उसके
हाथ मे एक लम्बा सा बास था । उस पर वह तेल से भरा
मटका आगे ओर एक मटका पिछे लेकर चलता था । उसने
देखा की आहा इतने लोग इकट्ठा हुए है तो हो सकता है की
कोई मुझसे तेल खरीद ले । तो उसने अपने मटको को निचे
रखा और खड़ा होकर उस तिर चलाने वाले आदमी का
प्रदर्शन देखने लगा । जब वह तिर चलाने वाला तिर मारने
लगे तो लोग उसकी वाह वाही करे, परन्तु वह तेल बेचने वाला
पीछे से कहे की '' यह सब अभ्यास की बात है । "
वह फिर तिर चलाए, फिर निशाना लगाए , परन्तु फिर तेल
बेचने वाला पीछे से कहे कि " यह सब अभ्यास की बात है "
वह फिर तिर चलाए, फिर निशाना लगाए ,
परन्तु तेल बेचने वाला फिर बोलता है कि " यह सब अभ्यास की बात है । यह सब अभ्यास का चक्कर है । यह कोई बड़ी
बात नही है । "
ऐसा करते - करते जो तिर चलाने वाला था । उसको बड़ा बुरा
लगा कि " मै इतना माहिर हूँ , । इस चीज को मे इतने अच्छे
तरीके से कर पाता हूँ । मै जैसा तिर चलाता हूं , वैसा ओर कोई नही चला सकता है । लोग हमारे लिए तालिया बजाते हैं । मान् - स्ममान् देते है और यह बदमास पिछे से बैठा - बैठा कह
रहा है कि - यह सब अभ्यास कि बात है , कोई बड़ी बात नही हैं । " जब प्रदर्शनी ख़तम हो गई तो वह तिर चलाने वाला तेल
वाले के पास गया और कहा, कि " तुम बिच - बिच मे ऐसा क्यो बोलते थे ? " तो तेल बेचने वाले ने कहा, " भाई ! यह सब अभ्यास कि ही तो बात है ? तुम तिर चलाने का अभ्यास करते हो, इसीलिए तुम बहुत अच्छे हो । " तिर चलाने वाले ने कहा, "तुम्हारा क्या मतलब है ? मै तिर चलाने का अभ्यास
करता हूँ , क्या इसलिए मे अच्छा हूँ ? मै तो अच्छा हूँ ही । "
तेल बेचने वाले ने कहा, नही ये सब अभ्यास कि बात है । "
तो तिर चलाने वाले ने पूछा " तुम्हरा क्या मतलब है । " तो तेल बेचने वाले के पास एक सिक्का था , जिसके बिच मे छेद था ।
आपको मालूम होगा कि जो पुराने सिक्के हुवा करते थे, उनमे
बिच मे छेद होता था । तो उसने वह् सिक्का लाया , जिसके बिच मे छेद् था, उसे बोतल के ऊपर रखा और मटके को उठाकर उससे उस सिक्के के छेद में से बोतल में तेल गिराने लगा । एक बूंद भी तेल उसे बोतल से बाहर नहीं टपका । तब वह तीर वाले आदमी से कहता है कि अब तुम करके दिखाओ ।
तब उसकी समझ में बात आई क्योंकि सचमुच में यह अभ्यास की बात है। बहुत तेज चलने का अभ्यास करता है , एयरटेल मटके से बोतल में डालने का अभ्यास करता है ।
यह इसमें माहिर है वह उसमें माहिर है । आप किस में माहिर है? आप क्रोध कितनी जल्दी करते है । 1 मिनट 1 सेकंड 5 सेकंड 10 सेकंड ? अगर आप बहुत जल्दी कर सकते हैं तो इसका मतलब है कि आप क्रोध करने में माहिर है ।इसका मतलब है कि आप क्रोध करने का अभ्यास करते हैं । रिश्ते करने में आपको कितना समय लगता है ? किसी ने आपसे बढ़िया घड़ी पहन रखी है। किसी के जूते आपसे अच्छे हैं । ईरिस्या में आपको कितना समय लगता है ? अगर ज्यादा समय नहीं लगता है तो इसका मतलब है कि आप इरिष्या करने का अभ्यास करते हैं । मै आपको समझाना चाह रहा हूंँ । अगर आप चाह ले तो कुछ भी कर सकते है । कोई कार्य कठिन नही है आप चाहे तो कुछ भी कर सकते है । आपके अंदर जूनून होना चाहिए कि हम यह कर सकते हैं । अगर आपको जिसमे
रुचि है उसको करते है तो सफलता आपको जल्दी मिल सकती है । क्योकि उसमे आप तन - मन से करते है । उसमे
रुची लेकर उस कार्य को करते है । जिसमे आप की रुची ना हो
आप उसमे सफलता नही पा सकते । काफी कठिनाइयों का
सामना करना पड़ेगा । और आपको जिसमे रुचि रहेगी । सफलता आसानी से मिल जाता है । अगर आप चाहो तो कुछ
भी कर सकते हो ।
आप इस चित्र के माध्यम से समझासकते हैं कि अगर खुद पर विश्वास है तो आप कुछ भी कर सकते हैं। कोई काम् करना मुश्किल नही होता है । जब आप एक चीटि को देखते है वह
एक छोटे से टुकड़े को अपने जगह तक पहुंचाने का कि प्रयास
करते है । ओर आखिर मे वह अपने कार्य मे सफल हो जाते है ।
इसी तरह हम ठान ले तो कुछ भी कर सकते है । कोई भी कार्य मुश्किल नही है । आप मे जूनून होना चाहिए फिर कोई भी कार्य कर सकते है । वेसे कई आदमी मिल जायेंगे । आप को कि ऐसे ऐसे कार्य किये कि उदहारण दे सकते है । दसर्थ्
मांझी को हि ले सकते है । उसके अंदर इतना जूनून था की वह पूरे पहाड़ को काटकर रास्ता बना दिये । उनके अंदर पुरा करने का जूनूनु था मन मे वह् ठान लिए थे की चाहे कितना भी दिन क्यो ना लगे हम पुरा कर के रहेंगे । पुरा करने मे उन्हे कैइ कठिनाईयो का सामना करना पड़ा था । उनके ऊँगली मे एक साप ने काट लिया था । उन्होंने उस समय क्या किया जानते है
उन्होंने अपना पेर का ऊँगली हि काट दिये थे । अगर उन्होंने हार मान् कर छोड दिये होते तो आज लोगों गाव से शहर कि
जाने के लिए रास्ता नही मिलता उस जिस गांव मे रहते थे । उस मे ना तो कोई सुधा था ना हि कोई दवा खाना नही था ओर
जाने के रास्ता भी नही था उसी कारन उनकी पत्नी की मिर्त्यु
हुवी थी । तब हि उन्होंने ठान लिये थे कि मे इस पhaad को
काट के रास्ता बना ना है चाहे जो हो जाये । आखिर कार उन्होंने रास्ता बना हि दिये । आज लोगो को कितनी सुविधा होती है । आज भी दसरथ मांझी को लोग आद करते है ।

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Good one
ReplyDeleteMust bro
ReplyDeleteThank you
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